Sunday, 26 January 2025

उजड़े दयार में रहने का

अजब इल्म है  दिल के दरार में रहने का
कि ता-उम्र एक उजड़े दयार में रहने का

'इल्म-ओ-फ़न को परखना  बोली लगाना  
अजब तौर-तरीका है  बाज़ार में रहने का

दौलत आबरू तबी'अत कुछ तो गँवाइये  
ऐसे ही नहीं मिलता अख़बार में रहने का

यहाँ से निकलना है औ" दश्त में जीना है     
जी नहीं करता यूँ चार-दीवार में रहने का

न कोई बिसात न कोई मोहरा खेल कैसा
फिर भी ख़ुद ही से तू-तुकार में रहने का

ज़मीं पर आओ अब कुछ बंदगी कर लो          
कब तक 'धरम' यूँ इश्तिहार में रहने का

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