मुझे अब यहाँ तेरी तरह मोहब्बत कौन करेगा
दिल के साथ रूह भी देने की हिम्मत कौन करेगा
तेरी क़ातिल सी निगाह है मगर तुम खुद क़त्ल हुए
मेरे खातिर अब यहाँ ऐसे मरने की हिम्मत कौन करेगा
हर दिन हर लम्हा यहाँ तुमने मुझे अपने पलकों पे बिठाया
इस बोझ को अब सर-आँखों पर बिठाने की हिम्मत कौन करेगा
मेरे लफ्ज़ में बारूद है जब भी बोलूं तो आग बरसता है
इस आग को हँसकर अब बुझाने की हिम्मत कौन करेगा
मैं अपने दिल पर हाथ रखकर "धरम" खुद ही से पूछता हूँ
बाद उसके तेरे हर जुर्म को माफ़ करने की हिम्मत कौन करेगा
दिल के साथ रूह भी देने की हिम्मत कौन करेगा
तेरी क़ातिल सी निगाह है मगर तुम खुद क़त्ल हुए
मेरे खातिर अब यहाँ ऐसे मरने की हिम्मत कौन करेगा
हर दिन हर लम्हा यहाँ तुमने मुझे अपने पलकों पे बिठाया
इस बोझ को अब सर-आँखों पर बिठाने की हिम्मत कौन करेगा
मेरे लफ्ज़ में बारूद है जब भी बोलूं तो आग बरसता है
इस आग को हँसकर अब बुझाने की हिम्मत कौन करेगा
मैं अपने दिल पर हाथ रखकर "धरम" खुद ही से पूछता हूँ
बाद उसके तेरे हर जुर्म को माफ़ करने की हिम्मत कौन करेगा