Saturday, 5 May 2012

आ... हा...

1.

झुकी निगाहों का सलाम बड़ा प्यारा था
वो तेरा एहतराम बड़ा प्यारा था
इश्क में पढ़ा तेरा वो एक कलाम
मेरे  हर एक कलाम से प्यारा था

उस पल का जो गुजरना था
जिंदगी का थोडा थम जाना था
अब याद कभी जब आती है
बस  आखें नम हो जाती है


2.

जिंदगी अब तुम मेरा और इम्तिहाँ मत ले
झूठे शान के भरम का, यूँ ही तुम जाँ मत ले
ज़रा रहम तो कर ऐ मेरे मौला मुझ पर
कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-शाँ का भरम रहने दे........

Friday, 27 April 2012

कशमकश

अजीब कशमकश में
मैं यूँ पड़ा हुआ हूँ
कुछ समझ न पा रहा हूँ
तू करीब है की दूर है

मैं आँखें बंद करता हूँ
तुमको करीब पाता हूँ
पलक जब खोलता हूँ फिर
तुमको दूर पाता हूँ

जिसे मैं दूर कहता हूँ
उसे कोई करीब कहता है
जिसे मैं करीब कहता हूँ
उसे कोई दूर कहता है

बदलते रिश्तों की दुनिया में
अब वह चाँद भी चुप है
" चंदा मामा " को कोई अब
" साला चाँद " कह रहा है

न जाने अब यहाँ क्यूँ
रिश्तों की घटी दुरी सी लगती है
मगर वह " साला चाँद " कहने वाला
मुझे कुछ दूर लगता है

Thursday, 12 April 2012

शेर










1.
लोग कहते हैं तू बड़ी दिलखुश्कुं है
तू दिल निहाद है, तू दिलनशी है
तेरी मिलकियत-ए-दिल से कभी "धरम" भी गुजरा था
एक वीराना सा सफ़र ही याद आता है 

2.
तू भी अपनी अब तरीकत कर लो 
एक bar फिर  थोड़ी  मुहब्बत  कर लो
यूँ तो वीरानगी परवान पर है
दिल बहलाने को अब ताज्ज़लीगाह चलते हैं

Tuesday, 10 April 2012

जाम @ एक शाम

शाम को यूँ ही जाम लेकर बैठा था
एक बिरहमन के ख्याल में
न जाने कब आँख लग गई
और फिर मैं सो गया
नींद खुली तो देखा
उस जाम को भी आँख लग गई थी
वह ज़मीं पर यूँ ही बिखरा पड़ा था

Tuesday, 3 April 2012

लघु कथा ...

वह आदतन कुछ तेज़ चल रहा था
रास्ते  बड़े  कठिन  थे
उसके चंद साथी  भी रास्ते में छूट गए
उसका मंजिल था " खुद का भाग्य पढना " 
रास्ते में उसने एक फकीर को देखा
सलाम फ़रमाया  और  फिर हाथ बढाया  
फकीर उसके हाथ की लकीरों को पढ़  रहा था
और कुछ बुदबुदा भी रहा था
वह कुछ समझ नहीं  पा रहा था
मगर उसे मंजिल का पता मिल गया 
वह उस पते की ओर बढ़  रहा था
और फिर वहां पहुँच जाता  है
जहाँ उसका भाग्य लिखा था
दरवाजे पर पहुँचकर वह आवाज़ देता है
चंद लम्हों के फासले पर
एक  फ़रिश्ता हाज़िर होता है
बिलकुल उसी के कद-काठी और शक्ल का
वह फ़रिश्ता कुछ यूँ फरमाता है
" जब तुम अपना भाग्य पढने के लिए
इतना कठिन परिश्रम कर सकते हो
तो अपना भाग्य भी तुम खुद लिख सकते हो "
यह सुनकर वह वापस आ जाता है
और फिर जुड़ जाता है अपने कार्यों में !!

बहार फिर आएगी

यूँ ही परीशां ना हो ऐ दिल
अब कि बहार फिर आएगी
गर तुम इंतजार करते हो
तो वो दिलदार फिर आएगी

टूटे हुए दिल को जोड़कर देखो
एक  नाम उभर कर आएगा
गर याद करो तुम तबियत से
वो शाम उभर कर आएगा

कुछ खुशफहमी के लम्हें भी हैं
जो तुमने कभी बिताये  थे 
कुछ याद करो उन लम्हों को
मन  फिर यूँ ही लग जायेगा

यूँ ही परीशां ना.....

Friday, 23 March 2012

ऐ मेरे प्यारे वतन


अपनी तबीयत अब किसी से मिलती नहीं
वज़ीरे आज़म की भी अब यहाँ चलती नहीं
चेहरे वज़ीरों के बदल जाते हैं अब दफअतन
तू ही बता कैसे भला हो ऐ मेरे प्यारे वतन

Thursday, 15 March 2012

तुम हो...

तुम हो तो जहाँ भी है
तुम हो तो फिज़ा भी है
तुम हो तो शमां भी है
तुम हो तो खुदा भी है

तुझमे ही फ़ना मैं हूँ
तुझमे भी दिखा मैं हूँ
ग़र तुझको यकीं ना हो
तो फुर्सत में कभी आइना देखना ...

Friday, 9 March 2012

तुम रंग भरो रे


अर्पित अपना स्नेह करो रे
जीवन में तुम रंग भरो रे
भूलकर सारे शिकवे-गिले
तुम भी सबके संग चलो रे

हर से हर का हाथ मिलेगा
जीवन में अब साथ मिलेगा
मिलकर फिर जज़्बात मिलेगा
पग-पग पर अब फूल खिलेगा

हर के रंग में रंगकर अब
निखर जायेगा रूप तुम्हारा
दुर्लभ कुछ भी शेष नहीं है
पा लेगा तू जीवन प्यारा ...

Friday, 2 March 2012

सोच

1.


मैं जब भी किसी नए जगह पर जाता हूँ
वहां एक अनजानी सी बू  आती है .....



2.


कीमत अदा करने चला था मोहब्बत-ए-वालिदैन का
एक भिखारी का वह कर्जखोर होकर वापस आया ....