Tuesday, 25 October 2022

आख़िरी आदाब अभी बाक़ी है

नींद पूरी हो चुकी है  मगर ख़्वाब अभी बाक़ी है 
कि मौत के बाद का कुछ हिसाब अभी बाक़ी है

दिल धड़कने का कुछ सबब तो चाहिए ही हुज़ूर 
कि साँसों में थोड़ी सी जान जनाब अभी बाक़ी है 

दिल का हर मामला ख़ुद से एक जंग है ख़ुद का 
ख़ुद से  ख़ुद का आख़िरी आदाब अभी बाक़ी है 

दिन ढल गया रात निकल आई चाँद उग आया 
फिर भी आसमाँ में वो आफ़ताब अभी बाक़ी है 

हाथ भी थाम कर रखा फ़ासला भी बनाये रखा  
होश में हैं मगर आँखों में शराब अभी बाक़ी है  

शक्ल को न तो ज़माना पढ़ पाया न ही आईना   
कि चेहरे पर 'धरम' और हिजाब अभी बाक़ी है

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