अभी घर से मत निकलो सियासी जंग जारी है
जनता भड़कने वाली है बाहर दिक्र-दारी है
मुनासिब की बातें न करो हर दौलतमंद भारी है
झोपड़ी गिरने वाली है हवेली बुलंद सारी है
कहीं हाथ ऊपर है कहीं गजराज भारी है
कहीं फूल उग रहे हैं कहीं साइकिल सवारी है
कहीं इंसान बिकते हैं कहीं बेईमान भारी है
धरम की बातें न करो "धरम" अब यहाँ कहाँ दीनदारी है
जनता भड़कने वाली है बाहर दिक्र-दारी है
मुनासिब की बातें न करो हर दौलतमंद भारी है
झोपड़ी गिरने वाली है हवेली बुलंद सारी है
कहीं हाथ ऊपर है कहीं गजराज भारी है
कहीं फूल उग रहे हैं कहीं साइकिल सवारी है
कहीं इंसान बिकते हैं कहीं बेईमान भारी है
धरम की बातें न करो "धरम" अब यहाँ कहाँ दीनदारी है