कि जो खुली किताब तो हर होंठ गुनगुनाने लगे मुझे
एक के बाद एक मेरे सारे दुश्मन अपनाने लगे मुझे
कि बात हवा के रुख़ की थी तो मैं भी साथ हो लिया
बाद इसके न जाने क्यूँकर लोग समझाने लगे मुझे
कि सिवा एक मेरे इश्क़ के तू किसी और की मुरीद नहीं
तेरी महफ़िल में इस बात पर लोग झुठलाने लगे मुझे
कि बाद तेरे जाने के भी वहाँ महफ़िल-ए-जॉ बाकी थी
न जाने क्यूँ लोग मुझको रोककर ये बतलाने लगे मुझे
उस मोहब्बत की कीमत 'धरम' मैं अब और क्या बताऊँ
तन्हाई से लिपटकर रोने में भी कितने हर्ज़ाने लगे मुझे
एक के बाद एक मेरे सारे दुश्मन अपनाने लगे मुझे
कि बात हवा के रुख़ की थी तो मैं भी साथ हो लिया
बाद इसके न जाने क्यूँकर लोग समझाने लगे मुझे
कि सिवा एक मेरे इश्क़ के तू किसी और की मुरीद नहीं
तेरी महफ़िल में इस बात पर लोग झुठलाने लगे मुझे
कि बाद तेरे जाने के भी वहाँ महफ़िल-ए-जॉ बाकी थी
न जाने क्यूँ लोग मुझको रोककर ये बतलाने लगे मुझे
उस मोहब्बत की कीमत 'धरम' मैं अब और क्या बताऊँ
तन्हाई से लिपटकर रोने में भी कितने हर्ज़ाने लगे मुझे