धर्म पूछ कर मारा जिसने
माँ भारती को ललकारा जिसने
वे मानवता पर हैं कलंक हैं नर-पिचाश के वंश
अपने इस कुकृत्य का झेलना होगा इन्हें दंश
ये सनातनी परंपरा है सिन्दूर है अनमोल
इसे किसी भी तुला पर न पाओगे तोल
छेड़ा है तुमने तो मोल चुकाना होगा
आसमाँ से बरसेगी आग तुम्हें बस पछताना होगा
जहाँ हो नारी शक्ति, वीर सपूत और धर्म भी हो साथ
उस पवन धरती का अपमान करोगे तो काट जायेगा हाथ
यहाँ तुमने मासूमों का अकारण रक्त बहाया है
ऐ आतंकियों तुमने तो मानवता को भी भरमाया है
कायरों की भाँति तुमने वार किया है आम जनों पर
अब तो बरसानी होगी आग तुझ जैसे सर्पों के फनों पर
तुझ जैसे पापियों को न्याय क्या है बतलाना होगा
अदम्य साहस शौर्य पराक्रम का परिचय देना होगा
लो ये बरसी आग तुझपर इससे अब न बच पाओगे
अगर बच भी गए तो जीवन में और क्या पाओगे
यह भारतवर्ष है सर्पों से भी युद्ध में धर्म नहीं छोड़ेगा
"जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे" से युक्तियुक्त संधान करेगा
नमन है यहाँ की सेना को उन सशस्त्र बल को
जिन्होंने कुचला है आतंकियों को और उसके शीश महल को
विश्व को धर्म का मार्ग बतलाते हैं यहाँ के सपूत
सब मिलकर इन्हें नमन करें ये हैं मानवता के दूत
इनके साहस शौर्य पराक्रम की गाथा का बार-बार करें गुणगान
और शहीदों को दें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और सम्मान
!! भारत माता की जय !!
!! जय हिन्द की सेना !!