Friday, 27 April 2012
Thursday, 12 April 2012
शेर
1.
लोग कहते हैं तू बड़ी दिलखुश्कुं है
तू दिल निहाद है, तू दिलनशी है
तेरी मिलकियत-ए-दिल से कभी "धरम" भी गुजरा था
एक वीराना सा सफ़र ही याद आता है
2.
तू भी अपनी अब तरीकत कर लो
एक bar फिर थोड़ी मुहब्बत कर लो
यूँ तो वीरानगी परवान पर है
दिल बहलाने को अब ताज्ज़लीगाह चलते हैं
Tuesday, 10 April 2012
जाम @ एक शाम
शाम को यूँ ही जाम लेकर बैठा था
एक बिरहमन के ख्याल में
न जाने कब आँख लग गई
और फिर मैं सो गया
नींद खुली तो देखा
उस जाम को भी आँख लग गई थी
वह ज़मीं पर यूँ ही बिखरा पड़ा था
Tuesday, 3 April 2012
लघु कथा ...
वह आदतन कुछ तेज़ चल रहा था
रास्ते बड़े कठिन थे
उसके चंद साथी भी रास्ते में छूट गए
उसका मंजिल था " खुद का भाग्य पढना "
रास्ते में उसने एक फकीर को देखा
सलाम फ़रमाया और फिर हाथ बढाया
फकीर उसके हाथ की लकीरों को पढ़ रहा था
और कुछ बुदबुदा भी रहा था
वह कुछ समझ नहीं पा रहा था
मगर उसे मंजिल का पता मिल गया
वह उस पते की ओर बढ़ रहा था
और फिर वहां पहुँच जाता है
जहाँ उसका भाग्य लिखा था
दरवाजे पर पहुँचकर वह आवाज़ देता है
चंद लम्हों के फासले पर
एक फ़रिश्ता हाज़िर होता है
बिलकुल उसी के कद-काठी और शक्ल का
वह फ़रिश्ता कुछ यूँ फरमाता है
" जब तुम अपना भाग्य पढने के लिए
इतना कठिन परिश्रम कर सकते हो
तो अपना भाग्य भी तुम खुद लिख सकते हो "
यह सुनकर वह वापस आ जाता है
और फिर जुड़ जाता है अपने कार्यों में !!
रास्ते बड़े कठिन थे
उसके चंद साथी भी रास्ते में छूट गए
उसका मंजिल था " खुद का भाग्य पढना "
रास्ते में उसने एक फकीर को देखा
सलाम फ़रमाया और फिर हाथ बढाया
फकीर उसके हाथ की लकीरों को पढ़ रहा था
और कुछ बुदबुदा भी रहा था
वह कुछ समझ नहीं पा रहा था
मगर उसे मंजिल का पता मिल गया
वह उस पते की ओर बढ़ रहा था
और फिर वहां पहुँच जाता है
जहाँ उसका भाग्य लिखा था
दरवाजे पर पहुँचकर वह आवाज़ देता है
चंद लम्हों के फासले पर
एक फ़रिश्ता हाज़िर होता है
बिलकुल उसी के कद-काठी और शक्ल का
वह फ़रिश्ता कुछ यूँ फरमाता है
" जब तुम अपना भाग्य पढने के लिए
इतना कठिन परिश्रम कर सकते हो
तो अपना भाग्य भी तुम खुद लिख सकते हो "
यह सुनकर वह वापस आ जाता है
और फिर जुड़ जाता है अपने कार्यों में !!
बहार फिर आएगी
यूँ ही परीशां ना हो ऐ दिल
अब कि बहार फिर आएगी
गर तुम इंतजार करते हो
तो वो दिलदार फिर आएगी
टूटे हुए दिल को जोड़कर देखो
एक नाम उभर कर आएगा
गर याद करो तुम तबियत से
वो शाम उभर कर आएगा
कुछ खुशफहमी के लम्हें भी हैं
जो तुमने कभी बिताये थे
कुछ याद करो उन लम्हों को
मन फिर यूँ ही लग जायेगा
यूँ ही परीशां ना.....
अब कि बहार फिर आएगी
गर तुम इंतजार करते हो
तो वो दिलदार फिर आएगी
टूटे हुए दिल को जोड़कर देखो
एक नाम उभर कर आएगा
गर याद करो तुम तबियत से
वो शाम उभर कर आएगा
कुछ खुशफहमी के लम्हें भी हैं
जो तुमने कभी बिताये थे
कुछ याद करो उन लम्हों को
मन फिर यूँ ही लग जायेगा
यूँ ही परीशां ना.....
Friday, 23 March 2012
ऐ मेरे प्यारे वतन
अपनी तबीयत अब किसी से मिलती नहीं
वज़ीरे आज़म की भी अब यहाँ चलती नहीं
चेहरे वज़ीरों के बदल जाते हैं अब दफअतन
तू ही बता कैसे भला हो ऐ मेरे प्यारे वतन
Thursday, 15 March 2012
तुम हो...
तुम हो तो जहाँ भी है
तुम हो तो फिज़ा भी है
तुम हो तो शमां भी है
तुम हो तो खुदा भी है
तुझमे ही फ़ना मैं हूँ
तुझमे भी दिखा मैं हूँ
ग़र तुझको यकीं ना हो
तो फुर्सत में कभी आइना देखना ...
तुम हो तो फिज़ा भी है
तुम हो तो शमां भी है
तुम हो तो खुदा भी है
तुझमे ही फ़ना मैं हूँ
तुझमे भी दिखा मैं हूँ
ग़र तुझको यकीं ना हो
तो फुर्सत में कभी आइना देखना ...
Friday, 9 March 2012
तुम रंग भरो रे
अर्पित अपना स्नेह करो रे
जीवन में तुम रंग भरो रे
भूलकर सारे शिकवे-गिले
तुम भी सबके संग चलो रे
हर से हर का हाथ मिलेगा
जीवन में अब साथ मिलेगा
मिलकर फिर जज़्बात मिलेगा
पग-पग पर अब फूल खिलेगा
हर के रंग में रंगकर अब
निखर जायेगा रूप तुम्हारा
दुर्लभ कुछ भी शेष नहीं है
पा लेगा तू जीवन प्यारा ...
Friday, 2 March 2012
सोच
1.
मैं जब भी किसी नए जगह पर जाता हूँ
वहां एक अनजानी सी बू आती है .....
2.
कीमत अदा करने चला था मोहब्बत-ए-वालिदैन का
मैं जब भी किसी नए जगह पर जाता हूँ
वहां एक अनजानी सी बू आती है .....
2.
कीमत अदा करने चला था मोहब्बत-ए-वालिदैन का
एक भिखारी का वह कर्जखोर होकर वापस आया ....
Tuesday, 21 February 2012
चंद-शेर
1.
पी कर ग़म को वो भी मुस्कुराते हैं "धरम"
तुम भी अपने चेहरे पर ख़ुशी रखा करो ...
2.
सुना है पहले पत्थरों में भी दिल होते थे
अब तो दिल ही पत्थर का हो गया है
आओ हम भी तन्हाई में ढूंढे
ख़ुशी के कुछ खामोश पल ...
3.
पीकर घूँट लहू का उसपर छा जाती है खुमारी
कोई तो बताओ यारो उसे क्यूँ है ऐसी बीमारी
4.
ऐ ग़म,
आओ मैं तुमसे सुलह कर लूँ
सारे अरमानो का ज़बह कर दूँ
तू भी तो अब याद रखेगा
तुमने मुझपर फतह कर ली ...
पी कर ग़म को वो भी मुस्कुराते हैं "धरम"
तुम भी अपने चेहरे पर ख़ुशी रखा करो ...
2.
सुना है पहले पत्थरों में भी दिल होते थे
अब तो दिल ही पत्थर का हो गया है
आओ हम भी तन्हाई में ढूंढे
ख़ुशी के कुछ खामोश पल ...
3.
पीकर घूँट लहू का उसपर छा जाती है खुमारी
कोई तो बताओ यारो उसे क्यूँ है ऐसी बीमारी
4.
ऐ ग़म,
आओ मैं तुमसे सुलह कर लूँ
सारे अरमानो का ज़बह कर दूँ
तू भी तो अब याद रखेगा
तुमने मुझपर फतह कर ली ...
Subscribe to:
Posts (Atom)