1.
सूखे अश्कों की लकीरें वो आइने में देखा करते हैं
दिल जब भी दुखता है वो यूँ ही किया करते हैं
2.
उसकी कश्ती डुबोने के लिए
हवा का एक झोंका ही काफी था
बारिश को यह पता भी था
क़स्दन वह भी सितम ढा गया
3.
जिगर का खून भी असर न कर सका
वो सितमगर तो बड़ा खून- ऐ-ख्वारी निकला
सूखे अश्कों की लकीरें वो आइने में देखा करते हैं
दिल जब भी दुखता है वो यूँ ही किया करते हैं
2.
उसकी कश्ती डुबोने के लिए
हवा का एक झोंका ही काफी था
बारिश को यह पता भी था
क़स्दन वह भी सितम ढा गया
3.
जिगर का खून भी असर न कर सका
वो सितमगर तो बड़ा खून- ऐ-ख्वारी निकला