Tuesday, 2 April 2013

प्यार मांगता है


वह कौन है जो मुझसे मेरा हिसाब  मांगता है
मेरे ख्वाब में आकर मेरा ही ख्वाब मांगता है

मैं जब भी रूठता हूँ वो मुझे मनाता है
और रूठने का मुझसे मेरा अंदाज़ मांगता है

चांदनी रात  ठंढी हवा  झील का किनारा
वो कौन है जो मुझसे मेरा प्यार मांगता है

घर की दीवार  दरख़्त की छाल और मानसपटल
वो कौन है जो मेरा नाम  नाम-ए-यार मांगता है

चेहरे पर मासूमियत  दिल में प्यार   बांह पसारे
वो कौन है जो लिपटने को मुझसे बार-बार मांगता है

वो हुस्न की अंगड़ाई  इश्क की गहराई "धरम"
भरे बाज़ार मुझसे सिपहसलार मांगता है

वो कौन है जो मुझसे मेरा प्यार मांगता है...


Monday, 1 April 2013

"अप्रैल फूल"

"अप्रैल फूल" का मजा ही अलग है .. अलग क्यूँ न हो इसमें पश्चिमी रंग जो है.. जी हाँ अपने देश में रहने वाले कुछ लोगों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से घोर असंतुष्टि है.. उनका मानना है की विदेशी रंग ही असली रंग है बाकि अपना रंग तो फींका है..कुछ लोग तो "फूल" का मतलब "पुष्प" समझते हैं और "बिपरीत लिंग" वाले मित्र को पुष्प अर्पित करते हैं और फिर उस पुष्प को पुष्पांजलि भी दे देते है और कहते हैं की ये "अप्रैल फूल" था..

मत खेल प्रिये


क्यूँ खेले है तू खेल प्रिये
अब दिल में कहाँ है मेल प्रिये
रख कर तुम वो वादे झूठे
क्यूँ ढूंढे है तू खुद में सच्चे

मुफलिस हूँ मैं खड़ा सड़क पर
देखता रहता तुझको छुपकर
रहना है किस्मत से दूर
हो गया मुझे ये भी मंजूर

Wednesday, 27 March 2013

प्रेमी-प्रेमिका की गोपनीय बातें


प्रेमिका प्रेमी से : तुम्हारा दिल पत्थर सा क्यूँ है ?
प्रेमी प्रेमिका से : तुम ही कहती थी न की दिल यदि पत्थर सा होता तो इसके टूटने का डर नहीं होता
प्रेमिका प्रेमी से : धत्त ये मैं तेरे लिए थोड़े न कही थी
प्रेमी प्रेमिका से : तो क्या तुम अपने लिए कही थी ?

प्रेमिका प्रेमी से : खैर जाने दो ... तुम तो यूँ ही बात बनाते हो.  अब तुम ये बताओ की तुम कभी-कभी गधे की        
                          तरह क्यूँ करते हो ....मुझे अच्छा नहीं लगता है...
प्रेमी प्रेमिका से : मुझे जब भी एहसास होता है कि तुम आज गधी कि तरह लग रही हो तो मैं सोचता हूँ कि अब
                        तो मुझे गधे के  तरह ही बात करना पड़ेगा नहीं तो तुमको बुरा लगेगा न !!

प्रेमिका प्रेमी से : तुम मुझे कभी-कभी गिद्ध कि तरह क्यूँ घूरते हो ?
प्रेमी प्रेमिका से :  जब तुम कोयल कि तरह सजकर कौवे की तरह बोली बोलती हो तो मुझे लगता है की मुझे
                          भी एक पक्षी की तरह ही व्यव्हार करना चाहिए...

प्रेमिका प्रेमी से : तुम बिल्कुल उल्लू हो ....
प्रेमी प्रेमिका से : हाँ ! यदि मैं उल्लू न होता तो मुझे ये कभी पता नहीं चल पाता की रात के अँधेरे में तुम मेरे
                         अलावा और कितनों से मिलती हो ...

प्रेमिका प्रेमी से : मेरी एक सहेली कविता (काल्पनिक नाम) का प्रेमी कितना अच्छा है .. वह उसकी हरेक बात
                         मानता है.."ही इज सो क्यूट"..
प्रेमी प्रेमिका से :  मुझे तो तुम्हारे अलावा अपने सारे मित्रों की प्रेमिकाएँ बहुत अच्छी लगती है.. पता नहीं
                         भगवान ने तुम्हारे अलावा बाकी सबों को इतना अच्छा क्यूँ बनाया... "ओह माई गॉड" !!!

Tuesday, 26 March 2013

हरजाई

तुम तो मुझे जिंदगी की दुआ न दो 
तुम हरजाई हो मुझे झूठी वफ़ा न दो 
रिश्ते जोड़ना रिश्ते तोडना 
तुम्हारे लिए खेल सतरंज सा है
प्यार तो ऐसा है की सिर्फ रंज सा है 
उससे वफ़ा की बात पर "धरम" 
अब तो हर सक्श तंग सा है

Friday, 15 March 2013

कमर टूट जाती है


मेरी कमर टूट जाती है
उधारी की लाठी पकड़कर खड़ा होता हूँ
मगर जब फ़क्त सूद
मूलधन से जियादा हो जाता है
मेरी कमर टूट जाती है

सड़क के किनारे खड़ा होकर
कातर निगाह से
बड़ी बड़ी गाड़ियों में झांकता हूँ
शाही कुत्तों को देखता हूँ
मेरी कमर टूट जाती है

महंगाई की मार ऐसी  है
की मुझ मुफलिस के पास
न "वायफ" है न "तवायफ" है
खाली थैली और खोखला दिल
हाँ मेरी कमर टूट जाती है

Saturday, 9 March 2013

जिंदगी और रिश्ता


औरों के शिकस्त पर मुस्कुराना ठीक नहीं
खुद अपनी शिकस्त पर रोना  भी ठीक नहीं
जिंदगी है, यह बहुत कुछ दिखाती है
यह कर्म भूमि भी यह धर्म भूमि भी
यह कर्त्तव्य भूमि भी यह रणभूमि भी

यहाँ रिश्ते बनते भी है टूटते भी हैं
कुछ रिश्ते गांठ के सहारे चलते भी हैं
अर्थ के नींब पर टिके रिश्ते
जरा सी चूक पर बिखर जाते हैं
कुछ ठिठुरते रिश्ते कुछ उबलते रिश्ते
मानो शर्द भी गर्म भी और हवा भी
मन यूँ उलझता है कि अब क्या करें


प्रेम की परिभाषा भी कुछ बदल सी गई है
जैसे मानो की प्रेम कोई व्यापार हो
आह!अगर प्रेम निःस्वार्थ और निश्छल हो
तो जीवन सुखी भी और सफल भी हो

Wednesday, 20 February 2013

चंद शेर

1.

गुजरे वक़्त में मैंने खुद को कुछ यूँ तलाशा 
जैसे डूब रही हो नैया और छूटती हो आशा ...

2.

मिले तो मुलाकात के कीमत वसूल गए 
खुद हसें और मुझको रुला के चले गए ...

3.

उसने मुझे तन्हा देखा अधूरा समझा 
मिला भी तो कहाँ कभी पूरा समझा ...

4.

तन्हाई की रात थी बहुत देर से गुजरी
ख़ामोशी रौशन थी और साँस थी ठहरी ...

5.

इश्क में रूठना, नाराज़ होना अदाकारी होता है 
जाम अगर न छलके तो कहाँ खुमारी होता है ...

6.

महफ़िल सजी और मेरे इश्क का जनाज़ा निकला 
हाय "धरम "ये कैसा प्यार का खामियाजा निकला

7.


खतरों का सिलसिला उसने जारी रखा 
मुफलिसी में भी इश्क का बीमारी रखा 

8.


अब तो यहाँ हर जगह  इन्शां बिकते हैं 
मगर फिर भी उसने अपना एतवारी रखा 

Tuesday, 12 February 2013

तन्हाई भी न रही


मोमबत्ती की मद्धिम रौशनी थी
सामने आइना था
मैं खुद को तलाश रहा था
तन्हाई मेरे बगल से गुजरी थी
चेहरे पर नकाब लिए
मैंने रोका उसे
बोला तू तो मेरी अपनी है
तू मुझसे दूर क्यूँ है
वो बोली
अब तन्हाई भी तेरी अपनी न रही

Saturday, 2 February 2013

लकीर


मेरा प्यार था दरिया था बह गया
तेरी खींची लकीरें को पार कर गया
वापस आया तुम्हें छू कर आया
कुछ यादें समेट कर साथ लाया

तेरे हुस्न की गर्मी से
तेरे अश्क सूख गए हैं मगर
यकीं है तेरे दिल का रूखापन
जरुर थोड़ा गीला हुआ होगा