1.
कि हर आलम मुझे नज़र आता तो है मगर लम्हा गुज़र जाने के बाद
मेरी आखों में लहू उतरता तो है "धरम" मगर ज़ख्म भर जाने के बाद
2.
कि मेरी याद 'धरम' उनके ज़हन में कब जा के उतरी
जब वो हर शख़्स से टूटे तन्हा हुए तब जा के उतरी
3.
इस बार की ये बेरुख़ी नाराज़गी क्या कहें जान लेकर जाएगी
औ" ग़र बच गए ज़िंदा "धरम" तो फिर ईमान लेकर जाएगी
कि हर आलम मुझे नज़र आता तो है मगर लम्हा गुज़र जाने के बाद
मेरी आखों में लहू उतरता तो है "धरम" मगर ज़ख्म भर जाने के बाद
2.
कि मेरी याद 'धरम' उनके ज़हन में कब जा के उतरी
जब वो हर शख़्स से टूटे तन्हा हुए तब जा के उतरी
3.
इस बार की ये बेरुख़ी नाराज़गी क्या कहें जान लेकर जाएगी
औ" ग़र बच गए ज़िंदा "धरम" तो फिर ईमान लेकर जाएगी